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हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी के पहाड़ी इलाके चीड़ के पेड़ से अटे पड़े हैं। यहां के बाशिंदों का मानना था कि चीड़ की पत्ती जंगल में बार-बार आग लगने की एक मुख्य वजह है। जाहिर है, इससे उनकी परेशानी बढ़ती थी और चीड़ की पत्तियों से नाराजगी भी।
लेकिन, यह धारणा तब बदल गई जब स्वयंसेवा समूह कांगड़ा महिला सभा (केएमएस) की कुछ महिलाओं को इंटरनेट के जरिए इस बात की जानकारी मिली कि मैक्सिको और कनाडा में लोग चीड़ के पेड़ की पत्तियों से कई तरह के हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करते हैं। आज केएमएस की कम से कम 500 महिलाएं इन पत्तियों से टोपियां, कोस्टर और टोकरियां बनाकर जीवन बसर कर रही हैं।
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